Vikash ak chuti.ya hai
विकाश सीवाल: एक नटखट लड़के की कहानी
विकाश सीवाल, जो कि राजस्थान के चूरू जिले के उदवाला गांव का रहने वाला है, एक ऐसा लड़का है जिसे गांव के लोग बड़े ही प्यार से "बेवकूफ" कहकर बुलाते हैं। लेकिन, इस "बेवकूफ" के पीछे एक अनोखी कहानी छुपी है। विकाश के पिताजी, श्री चतराराम, गांव के सम्मानित व्यक्ति हैं और उनकी सादगी और मेहनत की मिसाल दी जाती है। पर विकाश? वह तो अलग ही मिट्टी का बना है।
विकाश की हरकतें
गांव में जब भी कुछ नया होता है, तो मान लीजिए कि विकाश जरूर उसमें हाथ डाल देगा। खेतों में कभी बैल खोल देना, तो कभी अपने दोस्तों के साथ पानी की टंकी पर चढ़कर कूदना – विकाश हमेशा कुछ न कुछ ऐसा करता रहता है जिससे लोग सिर पकड़ लेते हैं।
एक बार की बात है, विकाश ने सोचा कि वह गांव के बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करेगा। किताबें लेकर बैठ गया और बच्चों को "गाय पर निबंध" लिखने को कहा। लेकिन, खुद ही निबंध सुनाने लगा, और अंत में बोल पड़ा, "गाय हमारे जीवन का सबसे बड़ा दोस्त है, लेकिन मुझे दूध से एलर्जी है।" गांव वाले इस बात पर हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
विकाश का सरल दिल
हालांकि विकाश को लोग "बेवकूफ" कहते हैं, लेकिन उसके दिल की सादगी और मदद करने का जज्बा सभी को प्रभावित करता है। एक बार गांव में किसी के घर की छत गिर गई, और विकाश ने बिना कुछ सोचे-समझे मजदूरों के साथ दिन-रात काम किया। वह गांव के हर बुजुर्ग का आदर करता है और बच्चों के लिए हमेशा कुछ न कुछ मजेदार करने की कोशिश करता है।
चतराराम जी का सिरदर्द
विकाश के पिताजी, श्री चतराराम, अक्सर उसके नटखटपन से परेशान रहते हैं। गांव के हर दूसरे दिन कोई न कोई विकाश की शिकायत लेकर उनके पास पहुंच जाता है। लेकिन एक पिता के तौर पर, चतराराम जी जानते हैं कि विकाश के दिल में बड़ों का आदर और दूसरों के लिए प्यार है।
निष्कर्ष
विकाश सीवाल भले ही गांव वालों के लिए "बेवकूफ" हो, लेकिन उसकी सरलता और सच्चाई ही उसकी पहचान है। वह जीवन को मजेदार बनाने में विश्वास रखता है और अपनी हरकतों से गांव में मुस्कान फैलाता रहता है। उदवाला गांव शायद उतना खास न लगता, अगर विकाश वहां न होता।
शायद विकाश को खुद नहीं पता, लेकिन उसकी "बेवकूफी" ही उसे खास बनाती है।
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